मेरे बारे में

- Prabodh Kumar Govil
- I am a freelancer running 'Rahi Sahyog Sansthan', an NGO working towards the employment of rural youth in India
शनिवार, 30 अप्रैल 2011
कभी झालावाड के दिन भी बहुरे थे
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011
वाह, जो है ही नहीं, वो भी क्या खूब है?
गुरुवार, 28 अप्रैल 2011
एक खूबसूरत, कैल्शियम - कमी वाला शहर
छलकते शीशे सी सतह वाला शहर
मंगलवार, 26 अप्रैल 2011
जैसे ज़मीन पर अल्मोड़ा
रविवार, 24 अप्रैल 2011
वहां ब्रेन ही उगने थे पथरीले शहर कोटा में
रामपुरों और सीतापुरों की भीड़ में एक 'भरतपुर'
कृषि उत्पादन की श्री वृद्धि और विकास की गंगा का शहर
शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011
पापा से ज्यादा दादा का लाडला - अलवर
बुधवार, 20 अप्रैल 2011
उसे मीत कम मुसाफिर ज्यादा मिले
मंगलवार, 19 अप्रैल 2011
पारस पत्थर का छुआ एक शहर
सोमवार, 18 अप्रैल 2011
संवेगी हवाओं के गुजरने से दौसा
रविवार, 17 अप्रैल 2011
अरेबियन नाइट्स का मज़ा राजस्थान में
शनिवार, 16 अप्रैल 2011
बाड़मेर के तन-बदन
शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011
दूध का जला
मंगलवार, 12 अप्रैल 2011
अनोखा, अद्भुत और अपरम्पार
एक सौ इक्कीस करोड़ लोग एक जगह रहें तो उन्हें हर बात की एक लम्बी रेंज चाहिए। यही रेंज हमारी भी सीमा है। हम इस सीमा में रहते हुए एक एक कर उन बातों का ज़िक्र करेंगे जो इस एक सौ इक्कीस करोड़ लोगों के राष्ट्र को अनोखा,अद्भुत और अपरम्पार बनाती हैं।हम अपनी बात का आरंभ भारत के एक राज्य ' राजस्थान ' से करते हैं। आज इसे क्षेत्रफल की नज़र से देश का सबसे बड़ा राज्य होने का दर्ज़ा प्राप्त है। ऐसा हमेशा से नहीं रहा। यह तो जब कुछ वर्ष पहले भारत के तीन बड़े राज्यों, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार का विभाजन हुआ तो स्वतः हो गया। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ और बिहार से झारखण्ड राज्य बन कर अलग हुए तब राजस्थान सबसे बड़ा राज्य बन गया। अब इस राजस्थान में कुल ३३ जिले हैं। यहाँ से २५ सांसद देश की लोक सभा में जाते हैं।यहाँ से कुल २०० विधायक चुने जाकर विधानसभा में बैठते हैं। जयपुर इस राज्य की राजधानी है जिसे पिछले काफी समय से ' पिंक सिटी ' या गुलाबी नगरी कह कर संबोधित किया जाता है। इसका कारण यह है कि इस शहर के पुराने भवनों पर गहरा भूरा सा गुलाबी देसी रंग किया जाता था। इस रंग ने इसे प्राकृतिक रंग से रंगे , सौंधी गंध वाले नियोजित शहर का दर्ज़ा दिया। और यह देश-विदेश में गुलाबी शहर के नाम से ख्यात हो गया। लोग बदलाव और नयापन पसंद करते हैं, इसलिए नए बने भवनों पर अब दूसरे रंग दीखते हैं। फिर भी कोई कोई शासक -प्रशासक इस के रंग की महिमा को बनाये रखने का प्रयास समय-समय पर करता रहा है।